Thursday, 5 September 2019

Safar

जान लो यह मुक्तसर है

ग़फ़लत में आदतें जो पकड़ी हैं तूने-
; color: #333333; font-family: "noto sans devanagari" , "calibri"; font-size: 18px;">व्यसन जो छुपा-छुपी में कर रहे हो

राहें जो भी, अंधेरे में जा रही हों-
उन पर, अगर तुम चल रहे हो;

उन आदतों को, उन रास्तों को
छोड़ दो तुम, छोड़ दो तुम, छोड़ दो।

***** ***** ***** ***** *****

जिंदगी का जो सफर है
फिर, जान लो यह मुक्तसर है

वर्चुअल दुनियां से जो नाता
तुमने जोड़ लिया है
नाते-रिश्तों को तुमने जो तोड़ दिया है

पड़ोसियों का हक़ जो तुमने मार लिया है
छोटे-बड़ों से दुआ-सलाम तक छोड़ दिया है;

जितने भी बिछड़े हैं, करीबी
जोड़ लो तुम, जोड़ लो तुम, जोड़ लो।

No comments:

Post a Comment