जान लो यह मुक्तसर है
ग़फ़लत में आदतें जो पकड़ी हैं तूने-
ग़फ़लत में आदतें जो पकड़ी हैं तूने-
राहें जो भी, अंधेरे में जा रही हों-
उन पर, अगर तुम चल रहे हो;
उन आदतों को, उन रास्तों को
छोड़ दो तुम, छोड़ दो तुम, छोड़ दो।
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जिंदगी का जो सफर है
फिर, जान लो यह मुक्तसर है
वर्चुअल दुनियां से जो नाता
तुमने जोड़ लिया है
नाते-रिश्तों को तुमने जो तोड़ दिया है
पड़ोसियों का हक़ जो तुमने मार लिया है
छोटे-बड़ों से दुआ-सलाम तक छोड़ दिया है;
जितने भी बिछड़े हैं, करीबी
जोड़ लो तुम, जोड़ लो तुम, जोड़ लो।